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3 August 2017

बैकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक-2017

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के डूबे ऋणों से राहत दिलाने हेतु रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया को व्यापक नियामक अधिकार देने सम्बन्धी बिल को हाल में ही लोकसभा में ध्वनिमत से पारित किया गया है। इसमें निम्नलिखित प्रावधान सम्मिलित हैंः-

  • नए कानून के तहत रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया को यह अधिकार मिल जाएगा कि वह फसे कर्जो की वसूली के लिए जरुरी कार्यवाही करने सम्बन्धी निर्देश बैंकों को दे सके।
  • इस नयी व्यवस्था के तहत अब तक 12 बड़े डिफॉल्टरों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरु कर दी गई है।
  • इस कानून के तहत अब रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया सहकारी बैंकों के खिलाफ भी कार्यवाही शुरु कर सकेगी। गौरतलब है कि इससे पहले रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया प्रत्यक्ष तौर से सहकारी बैंको के खिलाफ कार्यवाही करने से बचती थी।
  • हाल मे जारी ऑकड़ों के अनुसार सार्वजनिक बैंको का वर्तमान एन. पी. ए. 9 लाख करोड़ (13.11 प्रतिशत) हो गया है जिसके कारण बैंको का स्वास्थ्य चिंताजनक स्तर पर है।
  • अधिनियम बनने के बाद यह संशोधन विधेयक, बैकिंग विनियम अधिनियम 1949 का स्थान लेगा।

NOTA

भारत में NOTA का आरम्भ सन् 2013 में पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया में उच्चमत न्यायालय के निर्णय के बाद हुयी थी। ऐसा करने वाला भारत विश्व का 14 वाँ देश बना था। लेकिन इसके बाद भी भारतीय मतदाताओं को अभी तक उम्मीदवार को अस्वीकृत करने का अधिकार नहीं दिया गया है।
हाल में ही कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग के सामने यह मुद्दा रखा कि राज्य सभा चुनाव में किसी प्रकार की कोई गोपनीयता नहीं होती है अतः इन चुनावों से NOTA का विकल्प हटा लिया जाए लेकिन चुनाव आयोग ने कांग्रेस के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसके बाद कांग्रेस ने सर्वाेच्च न्यायालय में NOTA से सम्बन्धित याचिका दायर की लेकिन सर्वाेच्च न्यायालय बे भी इस याचिका को ठुकरा दिया।

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Amit Singh

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